आज फिर हद से गुज़र जाने को दिल करता है


आज फिर हद से गुज़र जाने को दिल करता है आगोश में उनके टूट कर बिखर जाने को दिल करता है  लाख दुशमन है जमाना तो अब डरना कैसा अब ऐसे ही तेरी बाहों में मर जाने को दिल करता है।

Post a Comment

0 Comments